March 4, 2021

Uttarakhand News : चार बंदी रक्षकों पर केस, कैदियों की महिला परिजनों से अश्लील बातें और रुपये मांगने का आरोप


न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, सितारगंज
Updated Sat, 16 Jan 2021 08:23 PM IST

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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एक महिला के डीजीपी को भेजे शिकायती पत्र के बाद सेंट्रल जेल के चार बंदी रक्षकों पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। महिला ने आरोप लगाया था कि बंदियों को सुविधाएं दिलाने के नाम पर ये लोग महिलाओं के परिजनों से अश्लील बातें करते हैं और रुपये भी मांगते हैं।

कोतवाल सलाहउद्दीन ने बताया कि डीजीपी के आदेश पर आईपीसी की धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना एसआई जूली राणा करेंगी।

सात अगस्त 2020 को रुद्रपुर की महिला ने डीजीपी को शिकायती पत्र भेजा था। उसने केंद्रीय कारागार के बंदी रक्षक/कारागार कर्मी प्रभु सिंह, अश्विनी शर्मा, पंकज नागियान और दुष्यंत सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। ये सभी बंदियों के घर की महिलाओं के फोन नंबर लेकर उनसे अश्लील बातें करते थे।

बंदियों को जेल में ब्लूटूथ, नशीले पदार्थ देने के एवज में सौदेबाजी करते थे और अपने बैंक खाते में रुपये मंगवाते थे। शुक्रवार को डीजीपी अशोक कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने सीओ सुरजीत कुमार और एसओजी को आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं।

कोरोनाकाल में कैदियों और बंदियों को छोड़ना हल्द्वानी जेल प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है। जेल प्रशासन को 35 कैदियों और 183 विचाराधीन बंदियों के आने का इंतजार है। इसकी पुष्टि वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने की है।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक आर्य ने बताया कि पेरोल पर छोड़े गए 36 बंदियों को गिरफ्तार करने के लिए पांच जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजा था। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने का अनुरोध किया गया था। इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

वहीं, चेतावनी के बाद एक विचाराधीन बंदी और एक सजायाफ्ता कैदी वापस लौटा है। उन्होंने कहा कि विचाराधीन 183 बंदियों के मामले में अब अदालत निर्णय करेगी। कोरोना महामारी के कारण शासन के निर्देश पर हल्द्वानी जेल से 78 कैदी छह माह की पेरोल पर छोड़े गए थे। कोरोनाकाल में अलग-अलग कारणों से दस कैदी सजा से मुक्त हो गए।

32 सजायाफ्ता कैदी जेल में लौटकर आ गए, जबकि 35 कैदी समयावधि पूरी होने के बाद नहीं पहुंचे हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्या ने बताया कि लौटकर नहीं आने वालों में सबसे अधिक 27 ऊधमसिंह नगर और चार मुरादाबाद के बंदी हैं।

इसी प्रकार अदालत ने 210 विचाराधीन बंदियों को छह माह की अंतरिम जमानत पर छोड़ा था। इनमें 26 विचाराधीन बंदी अन्य मामलों में गिरफ्तार होने पर जेल लौटे हैं। 183 विचाराधीन बंदी वापस लौटकर नहीं आए हैं।

एक महिला के डीजीपी को भेजे शिकायती पत्र के बाद सेंट्रल जेल के चार बंदी रक्षकों पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। महिला ने आरोप लगाया था कि बंदियों को सुविधाएं दिलाने के नाम पर ये लोग महिलाओं के परिजनों से अश्लील बातें करते हैं और रुपये भी मांगते हैं।

कोतवाल सलाहउद्दीन ने बताया कि डीजीपी के आदेश पर आईपीसी की धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना एसआई जूली राणा करेंगी।

सात अगस्त 2020 को रुद्रपुर की महिला ने डीजीपी को शिकायती पत्र भेजा था। उसने केंद्रीय कारागार के बंदी रक्षक/कारागार कर्मी प्रभु सिंह, अश्विनी शर्मा, पंकज नागियान और दुष्यंत सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। ये सभी बंदियों के घर की महिलाओं के फोन नंबर लेकर उनसे अश्लील बातें करते थे।

बंदियों को जेल में ब्लूटूथ, नशीले पदार्थ देने के एवज में सौदेबाजी करते थे और अपने बैंक खाते में रुपये मंगवाते थे। शुक्रवार को डीजीपी अशोक कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने सीओ सुरजीत कुमार और एसओजी को आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं।


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35 कैदी और 183 विचाराधीन बंदियों के लौटने का इंतजार



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