March 1, 2021

अमर उजाला एक्सक्लूसिव: अंग्रेजों के जमाने के जेल नियमों को बदलने की तैयारी


अरविंद उपाध्याय, अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Sun, 10 Jan 2021 05:02 PM IST

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अंग्रेजों के जमाने से चल रहे जेल नियमों को बदलने की तैयारी चल रही है। उत्तराखंड शासन ने इस मामले में जेल अधिकारियों की समिति से रिपोर्ट मांगी है। मॉडल जेल 2016 का अध्ययन कर जेल अधिकारी अपनी रिपोर्ट आईजी जेल के माध्यम से भेजेंगे।

जेल की खामियों को दुरुस्त करने और नियमों को संशोधित करने के लिए आईजी जेल ने एक समिति बनाई है। इस समिति में हल्द्वानी जेल के वरिष्ठ अधीक्षक मनोज आर्या को प्रमुख बनाया गया है। समिति में सितारगंज और टिहरी जेल के अधीक्षक सदस्य बनाए गए हैं। समिति पेरोल, सुरक्षा, मुलाकात से लेकर दंड प्रक्रिया के पुराने नियमों का अध्ययन कर रही है। 

मॉडल जेल 2016 का भी होगा अध्ययन
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने 2016 में एक मॉडल जेल मैनुअल तैयार किया है। इसमें जेल के लिए अधिवक्ता नियुक्त करने, जेल में विधिक कक्षा चलाने, कैदियों की स्वास्थ्य सुविधा, जेलों के आधुनिकीकरण कोष, जेल, पुलिस और न्यायालय के बीच समन्वय, जेल कर्मियों के कल्याण की सुविधा,  बच्चा जेल सहित कई बिंदुओं को शामिल किया गया है। जेल अधिकारी मॉडल जेल 2016 और पुराने नियमों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसमें वर्तमान स्थानीय हालातों के साथ-साथ सांविधानिक व्यवस्था का भी ख्याल रखा जाएगा।  प्रधानमंत्री ने भी पिछले दिनों देशभर के डीजीपी की वर्चुअल बैठक के दौरान जेल नियमों का भी जिक्र किया था। 

जेल के पुराने नियम हुए अप्रासंगिक 
अदालतों के निर्देशानुसार जेल में कई बदलाव किए गए हैं लेकिन पुराने नियमों में इनका उल्लेख नहीं है। कैदियों और बंदियों के प्रवेश से लेकर रिहाई तक की स्थिति नए नियम के तहत स्पष्ट होगी। जेल में अनुशासन टूटने पर दंड कानियम काफी लचीला है। पेरोल पर कैदियों को छोड़ने केलिए कोई स्पष्ट नियम नहीं है। मानवाधिकार आयोग ने कई निर्देश दिए हैं लेकिन पुरानी नियमावली में कोई जिक्र नहीं है। अब ई मुलाकात से लेकर तमाम आधुनिक व्यवस्थाएं लागू हो गई हैं। संशोधित नियमावली में इसका जिक्र किया जाएगा। अपराधी आधुनिक प्रणाली से लैस है लेकिन अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर कोई नियम नहीं बनाया गया है। पुराने नियमों से जेल अधिकारियों को रोज मर्रा के कार्यों में दिक्कत पेश आ रही थी। 

जेल नियमों के संशोधन को लेकर 15 दिनों में जेल अधिकारियों की समिति अपनी रिपोर्ट आईजी जेल को देगी।  इस बारे में विस्तृत जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है। 
-मनोज आर्या, वरिष्ठ जेल अधीक्षक हल्द्वानी

सार

  • शासन ने जेल अधिकारियों की समिति से रिपोर्ट मांगी 
  • तीन जेल अधीक्षकों की समिति रिपोर्ट बनाने में जुटी

विस्तार

अंग्रेजों के जमाने से चल रहे जेल नियमों को बदलने की तैयारी चल रही है। उत्तराखंड शासन ने इस मामले में जेल अधिकारियों की समिति से रिपोर्ट मांगी है। मॉडल जेल 2016 का अध्ययन कर जेल अधिकारी अपनी रिपोर्ट आईजी जेल के माध्यम से भेजेंगे।

जेल की खामियों को दुरुस्त करने और नियमों को संशोधित करने के लिए आईजी जेल ने एक समिति बनाई है। इस समिति में हल्द्वानी जेल के वरिष्ठ अधीक्षक मनोज आर्या को प्रमुख बनाया गया है। समिति में सितारगंज और टिहरी जेल के अधीक्षक सदस्य बनाए गए हैं। समिति पेरोल, सुरक्षा, मुलाकात से लेकर दंड प्रक्रिया के पुराने नियमों का अध्ययन कर रही है। 

मॉडल जेल 2016 का भी होगा अध्ययन

केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने 2016 में एक मॉडल जेल मैनुअल तैयार किया है। इसमें जेल के लिए अधिवक्ता नियुक्त करने, जेल में विधिक कक्षा चलाने, कैदियों की स्वास्थ्य सुविधा, जेलों के आधुनिकीकरण कोष, जेल, पुलिस और न्यायालय के बीच समन्वय, जेल कर्मियों के कल्याण की सुविधा,  बच्चा जेल सहित कई बिंदुओं को शामिल किया गया है। जेल अधिकारी मॉडल जेल 2016 और पुराने नियमों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसमें वर्तमान स्थानीय हालातों के साथ-साथ सांविधानिक व्यवस्था का भी ख्याल रखा जाएगा।  प्रधानमंत्री ने भी पिछले दिनों देशभर के डीजीपी की वर्चुअल बैठक के दौरान जेल नियमों का भी जिक्र किया था। 

जेल के पुराने नियम हुए अप्रासंगिक 

अदालतों के निर्देशानुसार जेल में कई बदलाव किए गए हैं लेकिन पुराने नियमों में इनका उल्लेख नहीं है। कैदियों और बंदियों के प्रवेश से लेकर रिहाई तक की स्थिति नए नियम के तहत स्पष्ट होगी। जेल में अनुशासन टूटने पर दंड कानियम काफी लचीला है। पेरोल पर कैदियों को छोड़ने केलिए कोई स्पष्ट नियम नहीं है। मानवाधिकार आयोग ने कई निर्देश दिए हैं लेकिन पुरानी नियमावली में कोई जिक्र नहीं है। अब ई मुलाकात से लेकर तमाम आधुनिक व्यवस्थाएं लागू हो गई हैं। संशोधित नियमावली में इसका जिक्र किया जाएगा। अपराधी आधुनिक प्रणाली से लैस है लेकिन अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर कोई नियम नहीं बनाया गया है। पुराने नियमों से जेल अधिकारियों को रोज मर्रा के कार्यों में दिक्कत पेश आ रही थी। 

जेल नियमों के संशोधन को लेकर 15 दिनों में जेल अधिकारियों की समिति अपनी रिपोर्ट आईजी जेल को देगी।  इस बारे में विस्तृत जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है। 

-मनोज आर्या, वरिष्ठ जेल अधीक्षक हल्द्वानी



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