February 24, 2021

पंजाब में 100 दिन का हुआ किसान आंदोलन, 15 जिलों में ‘अन्नदाताओं’ ने किया प्रदर्शन


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Jan 2021 02:17 AM IST

किसान आंदोलन (फाइल फोटो)
– फोटो : अमर उजाला

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केंद्रीय कृषि कानूनों के आंदोलन को पंजाब में 100 दिन हो चुके हैं। किसान नेताओं ने आंदोलन को जारी रखते हुए गुरुवार को भी राज्य के 15 जिलों में सड़कों पर उतरकर कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कमेटी बनाकर किसानों को गुमराह कर आंदोलन को खत्म करना चाहती है, वे ऐसा होने नहीं देंगे।

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में 24 सितंबर से शुरू हुए किसानों के आंदोलन को धीरे-धीरे 100 दिन हो गए हैं। दिल्ली धरने के बाद भी किसान पंजाब में आंदोलन को सुस्त नहीं पड़ने दे रहे हैं। किसान लगातार पंजाब में आंदोलन को गति देने में लगे हुए हैं। गुरुवार को भी कई किसान संगठनों ने पंजाब के 15 जिलों में कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। 

इस दौरान किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आंदोलन को लंबा खींचकर समाप्त करने के कई प्रयास कर चुकी है। 30 दिसंबर को हुई केंद्रीय स्तर पर बैठक के दौरान केंद्रीय नेताओं ने कमेटी बनाकर किसान नेताओं का गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए। 

भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के राष्ट्रीय महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने चेतावनी दी कि जब तक कृषि कानूनों को सरकार वापस नहीं लेगी तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। पंजाब के साथ ही दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के धरने को मजबूत करने के लिए पंजाब से किसानों के जत्थे लगातार रवाना हो रहे हैं, 26 नवंबर को दिल्ली कूच के बाद किसानों की संख्या में टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर दोगुनी हो चुकी है।

किसानों ने ट्रैक्टर मार्च को टाला 
सरकार के साथ बैठक में दो मुद्दों पर सहमति बनाने के बाद किसान नेताओं ने गुरुवार को होने वाले ट्रैक्टर मार्च को टाल दिया। हालांकि दिल्ली बॉर्डर के साथ ही पंजाब, हरियाणा में किसान नेताओं ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। किसान 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। पंजाब में तो इससे पहले से आंदोलन कर रहे थे।

केंद्रीय कृषि कानूनों के आंदोलन को पंजाब में 100 दिन हो चुके हैं। किसान नेताओं ने आंदोलन को जारी रखते हुए गुरुवार को भी राज्य के 15 जिलों में सड़कों पर उतरकर कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कमेटी बनाकर किसानों को गुमराह कर आंदोलन को खत्म करना चाहती है, वे ऐसा होने नहीं देंगे।

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में 24 सितंबर से शुरू हुए किसानों के आंदोलन को धीरे-धीरे 100 दिन हो गए हैं। दिल्ली धरने के बाद भी किसान पंजाब में आंदोलन को सुस्त नहीं पड़ने दे रहे हैं। किसान लगातार पंजाब में आंदोलन को गति देने में लगे हुए हैं। गुरुवार को भी कई किसान संगठनों ने पंजाब के 15 जिलों में कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। 

इस दौरान किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आंदोलन को लंबा खींचकर समाप्त करने के कई प्रयास कर चुकी है। 30 दिसंबर को हुई केंद्रीय स्तर पर बैठक के दौरान केंद्रीय नेताओं ने कमेटी बनाकर किसान नेताओं का गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए। 

भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के राष्ट्रीय महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने चेतावनी दी कि जब तक कृषि कानूनों को सरकार वापस नहीं लेगी तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। पंजाब के साथ ही दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के धरने को मजबूत करने के लिए पंजाब से किसानों के जत्थे लगातार रवाना हो रहे हैं, 26 नवंबर को दिल्ली कूच के बाद किसानों की संख्या में टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर दोगुनी हो चुकी है।

किसानों ने ट्रैक्टर मार्च को टाला 

सरकार के साथ बैठक में दो मुद्दों पर सहमति बनाने के बाद किसान नेताओं ने गुरुवार को होने वाले ट्रैक्टर मार्च को टाल दिया। हालांकि दिल्ली बॉर्डर के साथ ही पंजाब, हरियाणा में किसान नेताओं ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। किसान 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। पंजाब में तो इससे पहले से आंदोलन कर रहे थे।



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