February 26, 2021

जिसके इंतजार में हैं पंजाब के सरकारी मुलाजिम, उस आयोग का कार्यकाल दो महीने और बढ़ा


पंजाब के सरकारी मुलाजिमों को नए और संशोधित वेतनमान के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने छठे वेतन आयोग का कार्यकाल और दो महीने के लिए बढ़ाते हुए 28 फरवरी, 2021 तक कर दिया है। मुख्य सचिव विनी महाजन की ओर से जारी पत्र में यह जानकारी दी गई है।
 
उल्लेखनीय है कि वेतन आयोग की अवधि में इजाफा ऐसे समय में हुआ है जब दो हफ्ते पहले छठे वेतन आयोग के चेयरमैन द्वारा यह जानकारी दी गई थी कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। सरकारी मुलाजिम बीते पांच साल से इस आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। 

यह भी पढ़ें – सोनू सूद को मिला मां से जुड़ा खास तोहफा, भावुक हो उठा मसीहा, क्यों कहा- जल्द खींचूंगा सेल्फी 

पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय फरवरी, 2016 में वेतन आयोग का गठन किया गया था। तब सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव आरएस मान के नेतृत्व में आयोग का तीन सदस्यीय पैनल बनाया लेकिन इसके दो सदस्यों की नियुक्ति में ही नौ माह का समय बीत गया और दोनों सदस्यों की नियुक्ति नवंबर, 2016 में हो सकी। इसके बाद आयोग अपना कामकाज शुरू कर पाता, लेकिन राज्य में सरकार बदल गई। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ समय बाद आरएस मान ने व्यक्तिगत कारणों से आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कैप्टन सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव जय सिंह गिल को आयोग की कमान सौंपी और आयोग ने काम करना शुरू किया। 

यह भी पढ़ें – आज से पंजाब में फिर कोरोना टीकाकरण का ड्राई रन, पटियाला में तीन स्थानों पर होगा पूर्वाभ्यास 

खास बात यह रही कि वेतनमान संशोधन रिपोर्ट के लिए आयोग का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जाता रहा जबकि आयोग के समक्ष अब तक वेतनमान, भत्ते, वेतन-विसंगतियों और अन्य मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों के विभिन्न संघ और अन्य समूहों की ओर से 600 से अधिक रिप्रेजेंटेशन दी जा चुकी हैं। आयोग के गठन और इसके कामकाज को लेकर कर्मचारी संगठन शुरु से ही आवाज उठाते रहे हैं।

दरअसल, आयोग का गठन करने और उसके अध्यक्ष के बदलने के बाद भी राज्य सरकार ने आयोग को कोई कार्यालय स्टाफ नहीं दिया। बस चेयरमैन और सदस्य के रूप में ही यह आयोग चलता रहा। जनवरी, 2019 में आयोग ने सभी विभागों से कर्मचारियों संबंधी डाटा तलब किया था, लेकिन यह डाटा कंपाइल करने के लिए आयोग को स्टाफ ही नहीं दिया गया। नतीजतन प्रदेश के 3.5 लाख कर्मचारियों का डाटा कंपाइल करने का काम कछुआ चाल से आगे बढ़ा। इसके बाद सरकार ने 31 दिसंबर, 2019 तक आयोग का कार्यकाल बढ़ाया और फिर छह-छह माह के लिए कार्यकाल में इजाफा करते हुए इसे 31 दिसंबर, 2020 तक कर दिया गया था।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *