February 28, 2021

रामायण से जुड़ा विज्ञान : अब विक्रम विश्वविद्यालय में छात्र पढ़ेंगे, आखिर राम नाम के पत्थर क्यों तैरे


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रामायण पढ़ने और सुनने वालों को पता होगा कि राम नाम लिखे पत्थर समुद्र में तैर गए। रावण का पुष्पक विमान मन की गति से उड़ान भरता था। आकाशवाणी होती थी। श्रीरामचरित मानस के इन प्रसंगों के धार्मिक महत्व हैं, लेकिन अब इनसे जुड़ा विज्ञान भी पढ़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश के विक्रम विश्वविद्यालय में ‘श्रीरामचरित मानस में विज्ञान और संस्कृति’ प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इस पाठ्यक्रम को उत्तर प्रदेश सरकार के अयोध्या शोध संस्थान और संस्कृति विभाग की मदद से इसे पढ़ाया जाएगा।
 

 

देश में इस तरह का पहला पाठ्यक्रम 
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिलेश पांडेय का कहना है कि संभवत: देश में यह पहला ऐसा पाठ्यक्रम होगा, जिसमें धर्म का विज्ञान पढ़ाया जाएगा। इसमें पढ़ाने के लिए अयोध्या के वैदिक विद्वान को उज्जैन बुलाएंगे। हमने यह पाठ्यक्रम प्रारंभ में 20 सीटों के साथ शुरू किया है। वहीं पाठ्यक्रम में प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी एमपी ऑनलाइन के जरिए 28 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी रामचरितमानस में अंतर्निहित विभिन्न ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति के पहलुओं का गहन अध्ययन करेंगे कि राम नाम के पत्थर समुद्र में क्यों तैरे। रावण का पुष्पक विमान मन की गति से कैसे उड़ान भरता था। बाली के पास ऐसी कौन सी विद्या थी, जिससे वह रोज सुबह पृथ्वी के ढाई चक्कर लगा लेता था। आकाशवाणी कैसे होती थी। 

राम वनवास गमन पथ पर ले जाएंगे विद्यार्थियों काे
कुलपति ने कहा कि इस विषय में थ्योरी के साथ-साथ बड़ी संख्या में प्रैक्टिकल पर भी जोर दिया जाएगा। इसके तहत विद्यार्थियों को रामजन्म भूमि, वनवास पथ पर ले जाया जाएगा। हमारा उद्देश्य यह भी रहेगा कि वहां के संबंधित क्षेत्रों के विद्वानों के लेक्चर भी कक्षाओं में करवाए जाएं। इसके अलावा भगवान राम जिन स्थलों पर गए वहां पर छात्रों से रिपोर्ट भी तैयार करवाने की कोशिश रहेगी। इसके अलावा राम के अयोध्या में रहने, गुरु विश्वामित्र से ज्ञानार्जन करने, राक्षसों के अंत, अहिल्या उद्धार, सीता विवाह के स्थलों  से  भी रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी।

इस उद्देश्य से शुरू किया पाठ्यक्रम 
 इस पाठ्यक्रम को शुरू करने का उद्देश्य सनातन संस्कृति के विज्ञान के गुढ़ रहस्यों को अध्ययन के माध्यम से सबसे सामने रखना है। श्रीरामचरित मानस से जुड़े भौतिक, रसायन, जीव, पर्यावरण के साथ औषधीय विज्ञान से विद्यार्थियों को रूबरू होंगे। 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रोजगार देने के उपायों पर काम चल रहा है। पिछले 10 दिनों में मैंने 2 फैक्ट्रियों का उद्घाटन किया है। सोमवार को ही त्रिचुर की एक रेडीमेड गारमेंट की यूनिट जिसमें 4000 लोगों को रोजगार मिलेगा। उस यूनिट को लगाने के लिए समाधान निकाला गया है।
 

 

रामायण पढ़ने और सुनने वालों को पता होगा कि राम नाम लिखे पत्थर समुद्र में तैर गए। रावण का पुष्पक विमान मन की गति से उड़ान भरता था। आकाशवाणी होती थी। श्रीरामचरित मानस के इन प्रसंगों के धार्मिक महत्व हैं, लेकिन अब इनसे जुड़ा विज्ञान भी पढ़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश के विक्रम विश्वविद्यालय में ‘श्रीरामचरित मानस में विज्ञान और संस्कृति’ प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इस पाठ्यक्रम को उत्तर प्रदेश सरकार के अयोध्या शोध संस्थान और संस्कृति विभाग की मदद से इसे पढ़ाया जाएगा।

 

 

देश में इस तरह का पहला पाठ्यक्रम 

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिलेश पांडेय का कहना है कि संभवत: देश में यह पहला ऐसा पाठ्यक्रम होगा, जिसमें धर्म का विज्ञान पढ़ाया जाएगा। इसमें पढ़ाने के लिए अयोध्या के वैदिक विद्वान को उज्जैन बुलाएंगे। हमने यह पाठ्यक्रम प्रारंभ में 20 सीटों के साथ शुरू किया है। वहीं पाठ्यक्रम में प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी एमपी ऑनलाइन के जरिए 28 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।


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विज्ञान के पहलु जानेंगे छात्र





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