February 28, 2021

किसानों के समर्थन मेंः सिंघु बॉर्डर पर कबड्डी के मुकाबले में उतरीं 12 टीमें 


अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Updated Mon, 04 Jan 2021 06:36 AM IST

किसानों के समर्थन में कबड्डी का मैच…
– फोटो : amar ujala

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सिंघु बॉर्डर पर किसानों के विरोध का जज्बा रविवार को भी जारी रहा। एक तरफ किसान कृषि कानूनों के लिए सरकार पर वार कर रहे थे तो वहीं महिलाओं की कबड्डी के मैदान में खिलाड़ी एक-दूसरे को शिकस्त देने में पूरी जी जान से जुटे दिखे। सरकार से सोमवार को वार्ता से ठीक एक दिन पहले बॉर्डर पर कबड्डी टूर्नामेंट में जीत हासिल करने के लिए खिलाड़ी भी हरसंभव कोशिश करते दिखे।  

टूर्नामेंट में कुल 12 महिला टीमों ने हिस्सा लिया। इसकी शुरुआत करीब 11 बजे हुई। पंजाब के तरनतारण जिले के किसान मजदूर संघर्ष के संयुक्त सचिव सुखविंदर सिंह ने कहा कि अलग अलग राज्यों से आई खिलाड़ियों ने खुद पूछा कि टूर्नामेंट आयोजित करना चाहती हैं। इसके बाद योजना बनाई गई। विजेता टीम को 2,100 रुपये, जबकि उप विजेता टीम को 1,100 रुपये इनाम रखा गया। सुखविंदर ने लोगों की तरफ से दान की गई राशि से यह भी इनाम देने की घोषणा की। 

रविवार सुबह दिल्ली-एनसीआर में हुई बारिश से कई जगहों पर जलभराव से मुश्किलें पैदा हुईं। इसका सर्वाधिक असर सीमाओं पर विरोध दर्ज कर रहे किसानों पर पड़ा, क्योंकि अधिकतर समर्थक खुले में हैं। हालांकि बारिश का टूर्नामेंट में कोई असर नहीं दिखा, क्योंकि खिलाड़ियों ने जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। 

हरियाणा के जींद के मुख्य कोच जगबीर सिंह ने कहा कि टूर्नामेंट में अधिकांश खिलाड़ी कॉलेज की छात्राएं हैं। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की टीमों ने कबड्डी टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि किसानों के समर्थन में आए हैं और खेल के जरिये किसानों के जज्बे को सलाम किया गया ताकि अपने हक के लिए संघर्ष में उन्हें जीत मिले। टूर्नामेंट में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया। आंदोलन स्थल पर मौजूद एक खिलाड़ी ने कहा कि मैंने दिल्ली से राष्ट्रीय स्तर पर खेला है। 

मैच अच्छा रहा, लेकिन जीत नहीं मिली। खिलाड़ी रितिका दलाल ने कहा कि मैच टर्फ पर खेले जा रहे थे। रोहतक के कबड्डी कोच नरेंद्र कुमार ने कहा कि उन्हें व्हाट्सएप के जरिये टूर्नामेंट के बारे में जानकारी मिली। इसमें स्पष्ट किया गया था कि केवल लड़कियां ही खेलेंगे। टीम में मेरी जुड़वां बेटियों सहित 10 खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा को साबित किया। यह नॉकआउट टूर्नामेंट है, इसलिए सभी मैच जीतना जरूरी है। मेरी टीम दो अंकों से हार गई। रविवार का दिन किसानों के लिए भी वार्ता से पहले मंथन के बाद अधिकारों की लड़ाई में जीत के लिए विचार विमर्श का रहा। 

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के विरोध का जज्बा रविवार को भी जारी रहा। एक तरफ किसान कृषि कानूनों के लिए सरकार पर वार कर रहे थे तो वहीं महिलाओं की कबड्डी के मैदान में खिलाड़ी एक-दूसरे को शिकस्त देने में पूरी जी जान से जुटे दिखे। सरकार से सोमवार को वार्ता से ठीक एक दिन पहले बॉर्डर पर कबड्डी टूर्नामेंट में जीत हासिल करने के लिए खिलाड़ी भी हरसंभव कोशिश करते दिखे।  

टूर्नामेंट में कुल 12 महिला टीमों ने हिस्सा लिया। इसकी शुरुआत करीब 11 बजे हुई। पंजाब के तरनतारण जिले के किसान मजदूर संघर्ष के संयुक्त सचिव सुखविंदर सिंह ने कहा कि अलग अलग राज्यों से आई खिलाड़ियों ने खुद पूछा कि टूर्नामेंट आयोजित करना चाहती हैं। इसके बाद योजना बनाई गई। विजेता टीम को 2,100 रुपये, जबकि उप विजेता टीम को 1,100 रुपये इनाम रखा गया। सुखविंदर ने लोगों की तरफ से दान की गई राशि से यह भी इनाम देने की घोषणा की। 

रविवार सुबह दिल्ली-एनसीआर में हुई बारिश से कई जगहों पर जलभराव से मुश्किलें पैदा हुईं। इसका सर्वाधिक असर सीमाओं पर विरोध दर्ज कर रहे किसानों पर पड़ा, क्योंकि अधिकतर समर्थक खुले में हैं। हालांकि बारिश का टूर्नामेंट में कोई असर नहीं दिखा, क्योंकि खिलाड़ियों ने जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। 

हरियाणा के जींद के मुख्य कोच जगबीर सिंह ने कहा कि टूर्नामेंट में अधिकांश खिलाड़ी कॉलेज की छात्राएं हैं। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की टीमों ने कबड्डी टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि किसानों के समर्थन में आए हैं और खेल के जरिये किसानों के जज्बे को सलाम किया गया ताकि अपने हक के लिए संघर्ष में उन्हें जीत मिले। टूर्नामेंट में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया। आंदोलन स्थल पर मौजूद एक खिलाड़ी ने कहा कि मैंने दिल्ली से राष्ट्रीय स्तर पर खेला है। 

मैच अच्छा रहा, लेकिन जीत नहीं मिली। खिलाड़ी रितिका दलाल ने कहा कि मैच टर्फ पर खेले जा रहे थे। रोहतक के कबड्डी कोच नरेंद्र कुमार ने कहा कि उन्हें व्हाट्सएप के जरिये टूर्नामेंट के बारे में जानकारी मिली। इसमें स्पष्ट किया गया था कि केवल लड़कियां ही खेलेंगे। टीम में मेरी जुड़वां बेटियों सहित 10 खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा को साबित किया। यह नॉकआउट टूर्नामेंट है, इसलिए सभी मैच जीतना जरूरी है। मेरी टीम दो अंकों से हार गई। रविवार का दिन किसानों के लिए भी वार्ता से पहले मंथन के बाद अधिकारों की लड़ाई में जीत के लिए विचार विमर्श का रहा। 



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