February 28, 2021

बिहार के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष चिकित्सकों का परामर्श मिलेगा


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
– फोटो : अमर उजाला

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बिहार के ग्रामीण व सुदूर जगहों में निवास कर रहे लोगों को भी अब अपने नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों पर ही विशेष चिकित्सकों का परामर्श मिल जाएगा। उन्हें दवा और किसी दूसरे अस्पताल में रेफर किए जाने की सुविधा भी मिल सकेगी। रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष से इस सेवा के लिए बने ई संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा का उद्घाटन किया।

इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह इलाज के लिए सिर्फ 39 मरीज पहुंचते हैं। हम लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों को पदस्थापित किया।

जरूरत के अनुसार नियोजन एवं नियुक्ति की गई। साथ ही मुफ्त दवा का भी प्रबंध कराया गया। उसके बाद वर्ष 2006 के अंतिम माह में पुन: सर्वे कराया गया जिसमें यह जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर औसतन प्रतिमाह इलाज के लिए एक हजार से 15 सौ लोग पहुंचने लगे हैं।

सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर लैंडलाइन की व्यवस्था कराई गई और मुख्यमंत्री सचिवालय से सभी चीजों की सतत् निगरानी की गई। वर्ष 2018 की रिपोर्ट की अनुसार पूरे बिहार में एक माह में औसतन 10 हजार मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंचने लगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सर्वे की रिपोर्ट से पता चला कि बिहार के गरीब परिवारों का सबसे ज्यादा खर्च उनके इलाज पर होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था के लिए तेजी से काम किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरे-धीरे सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और विकसित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन के जरिए स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा। टेलीमेडिसिन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों का इलाज होगा और उनके लिए दवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

उन्होंने कहा कि रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम की आज शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ लोगों को अब मिल सकेगा। लोग समय अस्पताल पहुंच पाएंगे। एंबुलेंस कहां है, उसमें कौन मरीज है, कहां है, कहां जाना है, किसको ला रहे हैं, कहां ले जाना है सबकी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अश्विन पोर्टल की भी शुरुआत की गई है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं को समय पर पैसा उनके अकाउंट में चला जाएगा।

बिहार के ग्रामीण व सुदूर जगहों में निवास कर रहे लोगों को भी अब अपने नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों पर ही विशेष चिकित्सकों का परामर्श मिल जाएगा। उन्हें दवा और किसी दूसरे अस्पताल में रेफर किए जाने की सुविधा भी मिल सकेगी। रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष से इस सेवा के लिए बने ई संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा का उद्घाटन किया।

इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह इलाज के लिए सिर्फ 39 मरीज पहुंचते हैं। हम लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों को पदस्थापित किया।

जरूरत के अनुसार नियोजन एवं नियुक्ति की गई। साथ ही मुफ्त दवा का भी प्रबंध कराया गया। उसके बाद वर्ष 2006 के अंतिम माह में पुन: सर्वे कराया गया जिसमें यह जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर औसतन प्रतिमाह इलाज के लिए एक हजार से 15 सौ लोग पहुंचने लगे हैं।

सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर लैंडलाइन की व्यवस्था कराई गई और मुख्यमंत्री सचिवालय से सभी चीजों की सतत् निगरानी की गई। वर्ष 2018 की रिपोर्ट की अनुसार पूरे बिहार में एक माह में औसतन 10 हजार मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए पहुंचने लगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सर्वे की रिपोर्ट से पता चला कि बिहार के गरीब परिवारों का सबसे ज्यादा खर्च उनके इलाज पर होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों के इलाज की बेहतर व्यवस्था के लिए तेजी से काम किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरे-धीरे सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और विकसित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन के जरिए स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा। टेलीमेडिसिन के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों का इलाज होगा और उनके लिए दवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

उन्होंने कहा कि रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम की आज शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से एंबुलेंस सेवा का बेहतर लाभ लोगों को अब मिल सकेगा। लोग समय अस्पताल पहुंच पाएंगे। एंबुलेंस कहां है, उसमें कौन मरीज है, कहां है, कहां जाना है, किसको ला रहे हैं, कहां ले जाना है सबकी जानकारी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अश्विन पोर्टल की भी शुरुआत की गई है, जिससे आशा कार्यकर्ताओं को समय पर पैसा उनके अकाउंट में चला जाएगा।



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