March 4, 2021

बिहार: चुनाव जीतने के बाद भी चैन से नहीं रह पाएंगे ये 27 विधायक, जानिए इसकी वजह


पार्टियों के चुनाव चिह्न (फाइल फोटो)
– फोटो : Social Media

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बिहार विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीत हासिल करने वाले विधायकों की परेशानी बढ़ने वाली है। इसकी वजह है हारे हुए प्रत्याशियों का पटना उच्च न्यायालय का रुख करना। मामला दर्ज हो चुका है। मुख्य न्यायाधीश के सामने प्रस्तुति और लिस्टिंग भी हो चुकी है। चार जनवरी को अदालत खुलने के बाद सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

आयोग के फैसले पर खड़े किए सवाल
मामला दर्ज करवाने वालों में सबसे ज्यादा आठ राजद और छह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। पांच निर्दलीयों ने भी जीते हुए उम्मीदवारों की विजय पर आपत्ति जताई है। सत्ता के पांच प्रत्याशियों ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें तीन जदयू और दो भाजपा के उम्मीदवार हैं। इसके अलावा माकपा और बसपा के भी एक-एक प्रत्याशी शामिल हैं। दो ने चुनाव आयोग को पार्टी बनाया है।

यह भी पढ़ें- बिहार: जानिए कौन हैं आरसीपी सिंह जिन्हें नीतीश कुमार ने सौंपी है जदयू की कमान

निशाने पर हैं इन दलों के प्रत्याशी 
जिन विधायकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं उनमें सबसे ज्यादा नौ जदयू के जबकि छह भाजपा के हैं। राजद के सात विधायक हैं जिनकी जीत पर हारे हुए उम्मीदवारों ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस, माले, हम और लोजपा के एक-एक विधायक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं भाजपा के विधान पार्षद नवल किशोर यादव की जीत को  निर्दलीय प्रत्याशी अवधेश कुमार सिन्हा ने चुनौती दी है।

पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ से हुआ मुकदमा
उच्च न्यायालय के वकील शशिभूषण मंगलम ने कहा कि नियम के अनुसार नतीजे आने के 45 दिनों के अंदर कोई भी उम्मीदवार परिणाम को चुनौती दे सकता है। हारे हुए 29 उम्मीदवारों ने मतगणना में गड़बड़ी एवं अन्य आरोपों में 27 विधायकों के खिलाफ 24 दिसंबर तक अलग-अलग तारीखों में मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के भी उम्मीदवार शामिल हैं।

हारे प्रत्याशी – वर्तमान विधायक – क्षेत्र
कांग्रेस 
सुमंत कुमार – हम के अनिल कुमार: टिकारी
गजानन शाही – जदयू के सुदर्शन कुमार- बरबीघा
विनय वर्मा – भाजपा की रश्मि वर्मा – नरकटियागंज
उमेश कुमार राम – जदयू के अशोक कुमार चौधरी- सकरा
रवि ज्योति कुमार – जदयू के कौशल किशोर- राजगीर
मोहन श्रीवास्तव- भाजपा के प्रेम कुमार – गया शहर
अंबिका यादव – राजद के सुधाकर सिंह – रामगढ़
राजेंद्र प्रसाद सिंह-लोजपा के राजकुमार सिंह

राजद
शक्ति यादव- जदयू के प्रेम मुखिया – हिलसा
रितु जायसवाल – भाजपा की गायत्री देवी – परिहार
राजेंद्र प्रसाद – जदयू के दामोदार रावत- झाझा
अविनाश विद्यार्थी – भाजपा के प्रणव कुमार- मुंगेर
अबु दोजाना – जदयू के दिलीप राय
विपिन कुमार मंडल- जदयू के गोपाल मंडल – गोपालपुर
सरोज यादव – भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह – बड़हरा
दिगंबर तिवारी – जदयू के संजीव कुमार – परबत्ता

भाजपा
मिथिलेश तिवारी – राजद के प्रेम शंकर प्रसाद-बैकुंठपुर
सचींद्र प्रसाद सिंह- राजद के मनोज यादव- केसरिया

जदयू
रंजू गीता – राजद के मुकेश यादव – बाजपट्टी
श्याम बिहारी प्रसाद- राजद के शमीम अहमद – नरकटिया
महेंद्र राम – कांग्रेस की प्रतिमा कुमारी – राजापाकर

निर्दलीय
अनिल कुमार सिंह – जदयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव -सुपौल
रवींद्र प्रसाद – राजद के अजय यादव – अतरी
ललितेश रंजन झा – भाजपा के विनोद नारायण झा – बेनीपट्टी
बम शंकर चौधरी – राजद के भूदेव चौधरी
रहबर आबदीन – माले के महानंद सिंह अरवल

विधान परिषद
अवधेश कुमार सिन्हा – भाजपा के नवल किशोर यादव

आयोग के खिलाफ केस
विजय कुमार यादव
विश्वनाथ चौधरी

बिहार विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीत हासिल करने वाले विधायकों की परेशानी बढ़ने वाली है। इसकी वजह है हारे हुए प्रत्याशियों का पटना उच्च न्यायालय का रुख करना। मामला दर्ज हो चुका है। मुख्य न्यायाधीश के सामने प्रस्तुति और लिस्टिंग भी हो चुकी है। चार जनवरी को अदालत खुलने के बाद सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

आयोग के फैसले पर खड़े किए सवाल

मामला दर्ज करवाने वालों में सबसे ज्यादा आठ राजद और छह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। पांच निर्दलीयों ने भी जीते हुए उम्मीदवारों की विजय पर आपत्ति जताई है। सत्ता के पांच प्रत्याशियों ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें तीन जदयू और दो भाजपा के उम्मीदवार हैं। इसके अलावा माकपा और बसपा के भी एक-एक प्रत्याशी शामिल हैं। दो ने चुनाव आयोग को पार्टी बनाया है।

यह भी पढ़ें- बिहार: जानिए कौन हैं आरसीपी सिंह जिन्हें नीतीश कुमार ने सौंपी है जदयू की कमान

निशाने पर हैं इन दलों के प्रत्याशी 
जिन विधायकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं उनमें सबसे ज्यादा नौ जदयू के जबकि छह भाजपा के हैं। राजद के सात विधायक हैं जिनकी जीत पर हारे हुए उम्मीदवारों ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस, माले, हम और लोजपा के एक-एक विधायक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं भाजपा के विधान पार्षद नवल किशोर यादव की जीत को  निर्दलीय प्रत्याशी अवधेश कुमार सिन्हा ने चुनौती दी है।

पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ से हुआ मुकदमा
उच्च न्यायालय के वकील शशिभूषण मंगलम ने कहा कि नियम के अनुसार नतीजे आने के 45 दिनों के अंदर कोई भी उम्मीदवार परिणाम को चुनौती दे सकता है। हारे हुए 29 उम्मीदवारों ने मतगणना में गड़बड़ी एवं अन्य आरोपों में 27 विधायकों के खिलाफ 24 दिसंबर तक अलग-अलग तारीखों में मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के भी उम्मीदवार शामिल हैं।


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